वेदना लिंक पाएं Facebook X Pinterest ईमेल दूसरे ऐप जून 13, 2019 आंँखों से बहते अश्रुकण बिन बोले सब कुछ कह जाते मिट जाते हिय के शूल सब संताप अश्रु संग बह जाते वेदना की तीव्रतम धारा में मन मैल सभी के धुल जाते खिल जाते प्रेम के पुष्पकण मन बगिया व्याकुल महकाते अलौकिक अपनी आभा से जीवन का नव पथ दिखलाते लिंक पाएं Facebook X Pinterest ईमेल दूसरे ऐप टिप्पणियाँ DEEPAK CHAURASIYA13 जून 2019 को 11:27 pm बजेलाज़वाबजवाब देंहटाएंउत्तरजवाब देंAbhivyakti13 जून 2019 को 11:30 pm बजेधन्यवादजवाब देंहटाएंउत्तरजवाब देंटिप्पणी जोड़ेंज़्यादा लोड करें... एक टिप्पणी भेजें
लाज़वाब
जवाब देंहटाएंधन्यवाद
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